चैत्र नवरात्रि 2026 नवमी कन्या पूजन मुहूर्त: आज चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है, जिसे महानवमी या राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन, देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप—माता सिद्धिदात्री—की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान मनाया जाने वाला नौ दिनों का भक्ति और पूजा का काल भी इसी दिन समाप्त होता है। पूजा के बाद, *कन्या पूजन* किया जाता है, जिसके बाद व्रत तोड़कर (*पारण*) नवरात्रि के उत्सव का समापन किया जाता है। आइए जानते हैं कि आज, चैत्र नवरात्रि की नवमी पर, *कन्या पूजन* के लिए शुभ *मुहूर्त* क्या होगा।
तो आइए, हम *कन्या पूजन* के लिए शुभ *मुहूर्त* (समय), सटीक कार्यक्रम और रस्मों के बारे में जानें—ये ऐसी प्रथाएं हैं जिनसे जीवन में सुख, समृद्धि और शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त (नवमी 2026 कन्या पूजन मुहूर्त)
*दृक पंचांग* के अनुसार, चैत्र माह के *शुक्ल पक्ष* (चंद्रमा के बढ़ते चरण) की *नवमी तिथि* (नौवां चंद्र दिवस) कल—26 मार्च को—सुबह 11:48 बजे शुरू हुई। यह *तिथि* आज—27 मार्च को—सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। चैत्र नवरात्रि नवमी 2026 का संयोग (चैत्र नवरात्रि 2026 महानवमी संयोग)
इस वर्ष महानवमी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन *रवि योग* और *सर्वार्थसिद्धि योग* का एक अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक परंपराओं में, *रवि योग* और *सर्वार्थसिद्धि योग* दोनों को ही अत्यंत फलदायी और शक्तिशाली माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन विशिष्ट *योगों* के दौरान की गई पूजा-अर्चना और अनुष्ठान, विभिन्न प्रकार के कष्टों (*दोषों*) को दूर करने में सहायक होते हैं और शुभ परिणामों की प्राप्ति कराते हैं।
माँ सिद्धिदात्री का महत्व
महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। देवी माँ के इस स्वरूप के बारे में यह माना जाता है कि वे अपने भक्तों को *सिद्धियाँ* (अलौकिक शक्तियाँ) प्रदान करती हैं और उनकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे हृदय से उनकी आराधना करने से, संपूर्ण नौ-दिवसीय नवरात्रि अनुष्ठान का आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है और जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं।
माँ सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें?
पूजा-अर्चना के लिए, प्रातःकाल स्नान करने के पश्चात्, माँ सिद्धिदात्री के समक्ष *घी* का दीपक (*दीया*) प्रज्वलित करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। देवी को फल, मिष्ठान अथवा नौ प्रकार के विभिन्न व्यंजनों (*भोग*) का नैवेद्य अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके उपरांत, “ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः” मंत्र का जाप करें। पूजा-अर्चना संपन्न होने के पश्चात्, सर्वप्रथम *प्रसाद* (पवित्र भोग) को जरूरतमंदों में वितरित करें, और तत्पश्चात् स्वयं ग्रहण करें।
कन्या पूजन कैसे करें?
देवी माँ की पूजा-अर्चना के पश्चात् *कन्या पूजन* (छोटी बालिकाओं की पूजा) का विधान है। इस अनुष्ठान हेतु, छोटी बालिकाओं को घर पर आमंत्रित किया जाता है और अत्यंत आदर-सत्कार के साथ उनका सम्मान किया जाता है। उनके चरण प्रक्षालित किए जाते हैं, उनके ललाट पर *तिलक* (पवित्र चिह्न) लगाया जाता है, और उन्हें भोजन कराया जाता है। इस विशेष दिवस के लिए, पारंपरिक रूप से *हलवा*, *पूरी* और *चना* (काले चने) से निर्मित विशेष *प्रसाद* तैयार किया जाता है। लड़कियों के साथ-साथ एक छोटा लड़का भी बैठा होता है, क्योंकि उसे भगवान भैरव का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। भोजन के बाद उन्हें उपहार और *दक्षिणा* (नकद भेंट) दी जाती है, और उनका आशीर्वाद मांगा जाता है।






