नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके की जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है। NIA की चार्जशीट के मुताबिक, यह धमाका एक आत्मघाती बम हमला था। एजेंसी का दावा है कि धमाके के समय आरोपी उमर-उन-नबी (A-1) कार के अंदर मौजूद था। चार्जशीट में कहा गया है कि उसने एक खास कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके कार में लगे IED को एक्टिवेट किया था।
NIA के मुताबिक, इस मामले में शामिल टेरर मॉड्यूल की विचारधारा और गतिविधियों की भी बारीकी से जांच की गई। एजेंसी का कहना है कि इस मॉड्यूल से जुड़े आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और हिंसक गतिविधियों की तैयारी कर रहे थे। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से कथित तौर पर पता चला कि आरोपी आतंकवादी हमलों के लिए रणनीतिक और ऑपरेशनल जानकारी इकट्ठा कर रहे थे।
‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ से जानकारी जुटाना
NIA की चार्जशीट में ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक: हाउ टू बिकम ए किलर’ (Lone Mujahid Pocket Book: How to Become a Killer) नाम के एक दस्तावेज का भी जिक्र है। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर इस किताब या मैनुअल में दी गई जानकारी का इस्तेमाल कर रहे थे। चार्जशीट से पता चलता है कि यह दस्तावेज AQAP (अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला) से जुड़ा है और इसमें विस्फोटक, हथियार, गुप्त ऑपरेशन और IED के बारे में जानकारी थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस दस्तावेज में TATP जैसे विस्फोटकों और रिमोट कंट्रोल से धमाके करने की तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी। इसके अलावा, इसमें लड़ाई, निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों से बचने, भागने की रणनीतियों और गुप्त रूप से काम करने जैसे तरीकों के बारे में भी जानकारी थी। NIA का दावा है कि इस तरह की सामग्री ने कथित टेरर मॉड्यूल को हमले की तैयारी करने और अपनी गतिविधियों को छिपाने में मदद की।
‘लगातार सशस्त्र संघर्ष एक धार्मिक कर्तव्य है’
NIA की चार्जशीट में एक ऐसे प्रोपेगैंडा दस्तावेज का भी जिक्र है, जिस पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और मौजूदा राजनीतिक प्रणालियों के खिलाफ हिंसक संघर्ष की विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप है। एजेंसी के अनुसार, इस दस्तावेज़ में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को “शैतानी और अत्याचारी” बताया गया और उन्हें हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने की वकालत की गई।
चार्जशीट में कहा गया है कि इस दस्तावेज़ में इस विचार का प्रचार किया गया कि मुस्लिम समुदाय “जिहाद” छेड़े बिना सम्मान हासिल नहीं कर सकता—यानी लगातार सशस्त्र संघर्ष को एक धार्मिक कर्तव्य के तौर पर पेश किया गया। NIA का कहना है कि इसी कट्टरपंथी विचारधारा ने लाल किले में हुए धमाके के सिलसिले में जांच के दायरे में आए मॉड्यूल की गतिविधियों के लिए वैचारिक आधार तैयार किया।
‘गज़वा-ए-हिंद’ के नाम पर हिंसा का समर्थन
जांच एजेंसी के अनुसार, बरामद प्रोपेगैंडा सामग्री में हिंसा को धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई। इसमें ‘गज़वा-ए-हिंद’ के नाम पर हिंसक गतिविधियों को सही ठहराया गया। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि दस्तावेज़ में इराक, अफगानिस्तान और अमेरिका में विद्रोही आंदोलनों का ज़िक्र किया गया और कथित तौर पर उनका समर्थन किया गया।
AGuH मॉड्यूल पर NIA का फोकस
लाल किले में हुए धमाके की जांच में NIA ने अंसार गज़वत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है। एजेंसी की चार्जशीट में इस मॉड्यूल की पहचान उस नेटवर्क के हिस्से के तौर पर की गई है जो कथित तौर पर धमाके से जुड़ा है। जांच के दौरान मिली विचारधारा, प्रोपेगैंडा सामग्री और ऑपरेशनल दस्तावेज़ों को आपस में जोड़कर एजेंसी ने पूरे मामले की कड़ियों को एक साथ लाने की कोशिश की है।
सबसे अहम खुलासा उमर-उन-नबी से जुड़ा है। NIA के अनुसार, धमाके के समय उमर नबी कार के अंदर ही था और उसी ने IED को एक्टिवेट किया था। एजेंसी के इस दावे के बाद, लाल किले के पास 10 नवंबर, 2025 को हुए धमाके की जांच को एक नई दिशा मिली है और अब इस घटना को आत्मघाती हमले के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला कोर्ट की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो पाएगा।
निष्कर्ष
लाल किले के पास हुए धमाके के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में एक अहम खुलासा हुआ है। एजेंसी के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुआ धमाका एक आत्मघाती हमला था और आरोपी उमर नबी ने कार के अंदर बैठे-बैठे ही IED को एक्टिवेट किया था। चार्जशीट में दी गई पूरी जानकारी पढ़ें।





