शहरी मौसम निगरानी को मिलेगी नई मजबूती चार महानगरों में 200 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की तैनाती,

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत की शहरी मौसम निगरानी व्यवस्था के बड़े विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि वर्ष 2026 के दौरान देश के चार प्रमुख महानगरों में कुल 200 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) स्थापित किए जाएंगे। यह पहल घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में हाइपर-लोकल और रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान को सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों, मौसम विज्ञान विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों को संबोधित करते हुए बताया कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में 50-50 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों के माध्यम से मौसम से जुड़े सूक्ष्म और उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्राप्त होंगे, जिससे अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान, भीषण गर्मी, तापमान में तीव्र बदलाव और वायुदाब में तेजी से होने वाले परिवर्तनों की अधिक सटीक भविष्यवाणी संभव हो सकेगी।

डेटा-आधारित मौसम पूर्वानुमान न केवल आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है बल्कि कृषि, विमानन, शहरी नियोजन, सार्वजनिक सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में सूचित निर्णय लेने के लिए भी यह अनिवार्य हो चुका है।

IMD के 151वें स्थापना दिवस पर ऐतिहासिक घोषणा

यह महत्वपूर्ण घोषणा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 151वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर की गई। यह अवसर संगठन के डेढ़ सौ वर्षों से अधिक के राष्ट्रसेवा के समर्पित योगदान का प्रतीक है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर की ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करते हुए स्मरण किया कि पिछले वर्ष इसी दिन IMD ने अपनी 150वीं वर्षगांठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारत मंडपम में मनाई थी।इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया प्रोत्साहन और सराहना IMD के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला क्षण था, जिसने संगठन की ऊर्जा और कार्यगति को दोगुना कर दिया। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह है कि बीते एक वर्ष में IMD द्वारा अनेक नई पहलें, तकनीकी नवाचार और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कार्य किए गए हैं।

भारत के इतिहास के साथ IMD की यात्रा

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि IMD की यात्रा भारत के प्रशासनिक और ऐतिहासिक विकास के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यह संगठन स्वतंत्रता-पूर्व काल से लेकर आधुनिक भारत तक देश की आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर स्वयं को ढालता रहा है। उन्होंने बताया कि IMD की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत से हुई, फिर इसका केंद्र कोलकाता, शिमला, पुणे होते हुए अंततः नई दिल्ली पहुंचा।उन्होंने कहा कि प्रत्येक चरण में IMD ने न केवल भौगोलिक विस्तार किया बल्कि नई वैज्ञानिक क्षमताओं, उभरती तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाते हुए स्वयं को और अधिक सक्षम बनाया।

मौसम पूर्वानुमान में अभूतपूर्व सुधार

मंत्री ने भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं में आए उल्लेखनीय परिवर्तन को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले दशकों की तुलना में पूर्वानुमान की सटीकता में 40 से 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि चक्रवात ट्रैक पूर्वानुमान की सटीकता में 35 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है,मासिक और मौसमी पूर्वानुमानों की त्रुटि पहले लगभग 7.5 प्रतिशत थी, जो अब घटकर करीब 2.5 प्रतिशत रह गई है, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन उपलब्धियों का श्रेय लगातार निवेश, तकनीकी स्वतंत्रता, संस्थागत समर्थन और वैज्ञानिकों को मिले नीतिगत विश्वास को दिया, जो पिछले एक दशक में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

मिशन मौसम – सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मिशन मौसम’ की शुरुआत मौसम विज्ञान और जलवायु सेवाओं के क्षेत्र में सरकार की स्पष्ट मंशा और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री इस प्रकार की पहल को राष्ट्रीय मंचों से संबोधित करते हैं, तो यह न केवल वैज्ञानिक समुदाय को प्रेरित करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि सरकार वैज्ञानिक क्षमता निर्माण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

क्षेत्रीय सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका

आज भारत मौसम और आपदा प्रबंधन सेवाओं में एक क्षेत्रीय नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत अब बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को आपदा से संबंधित मौसम जानकारी और उपग्रह आधारित सहायता प्रदान कर रहा है।उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिली है और भारत की भूमिका एक विश्वसनीय और जिम्मेदार भागीदार के रूप में स्थापित हुई है।

IMD का अभूतपूर्व बुनियादी ढांचा विस्तार

IMD के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि

पिछले एक दशक में मौसम रडारों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है

वर्तमान में ये रडार देश के लगभग 87 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को कवर कर रहे हैं

डॉप्लर वेदर रडार, सौर विकिरण निगरानी नेटवर्क, एरोसोल मॉनिटरिंग सिस्टम, माइक्रो रेडियोमीटर और वर्षा निगरानी योजनाएं अब जिला और ब्लॉक स्तर तक पहुंच चुकी हैं

IMD द्वारा विकसित अल्ट्रा-शॉर्ट रेंज पूर्वानुमान प्रणाली के तहत नागरिक अब तीन घंटे तक की सटीक समय-सीमा में मौसम संबंधी निर्णय ले सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि IMD की बढ़ती विश्वसनीयता और सटीकता का प्रमाण यह है कि जनता की ओर से इसकी सेवाओं की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। उन्होंने हाल ही में आए एक भूकंपीय घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भारी संख्या में लोगों द्वारा वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंच बनाए जाने से अस्थायी दबाव की स्थिति बनी।उन्होंने कहा कि हालांकि यह चुनौतीपूर्ण था, लेकिन यह घटना इस बात का प्रमाण भी है कि लोग IMD पर कितना भरोसा करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि डिजिटल अवसंरचना को और अधिक मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

ग्रीन एनर्जी और सतत विकास

मंत्री ने IMD के हरित ऊर्जा लक्ष्यों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि IMD मुख्यालय उन शुरुआती सरकारी संस्थानों में शामिल था जिसने राष्ट्रीय विद्युत योजनाओं के तहत पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा को अपनाया।इस परिवर्तन से न केवल बिजली खर्च में बड़ी बचत हुई है, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड में वापस भी भेजा जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल रहा है।

151वां स्थापना दिवस समारोह

इस समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और IMD परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। मंत्री ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और संगठन में समावेशी और निष्पक्ष मान्यता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नेतृत्व की सराहना की।

नई सुविधाओं का उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD परिसर में कई महत्वपूर्ण सुविधाओं का उद्घाटन किया जिनमें शामिल हैं…

मॉडल ऑब्ज़र्वेटरी

3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन

एग्रो-ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन

उन्होंने कहा कि ये सुविधाएं स्वदेशी, किफायती और मॉड्यूलर मौसम तकनीकों पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाती हैं।

उन्नत उपकरणों का निरीक्षण

IMD परिसर में स्थापित उन्नत मौसम उपकरणों और स्वचालित निगरानी प्रणालियों का भी निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने उन्हें रेडिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम, पोर्टेबल ऑब्ज़र्वेशन यूनिट्स और सेंसर आधारित नेटवर्क की कार्यप्रणाली की जानकारी दी।डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन प्रणालियों की तकनीकी गहराई और व्यावहारिक उपयोगिता की सराहना करते हुए कहा कि ये जलवायु अनुसंधान, पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में भारत की क्षमता को और अधिक मजबूत कर रही हैं।

भविष्य की दिशा

अपने संबोधन के समापन में मंत्री ने कहा कि सरकार देशभर में उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) और अतिरिक्त क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों की स्थापना के प्रस्तावों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे-जैसे IMD अपने 152वें वर्ष में प्रवेश करेगा, उसकी सटीकता, विश्वसनीयता और जनविश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा, जिससे यह संगठन भारत की आपदा तैयारी और जलवायु सेवा व्यवस्था की रीढ़ बना रहेगा

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