चंबल के खतरनाक डकैत जगन गुर्जर की कहानी जिसके डर से गांव में नहीं आई 10 साल तक कोई बारात!

राजस्थान के अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में आज से 3 दिन पहले राजस्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की गला घोटकर हत्या कर दी गई आरोप लगा भरतपुर के कुलदीप जगिना के हत्यारे गैंगस्टर विष्णु पर, डकैत जगन गुर्जर वह नाम था जो सबसे ज्यादा वारदातों में शामिल रहा,एक जामाने में तीन-तीन राज्यों में उसके नाम से लोग कांप जाया करते थे, डकैत जगन गुर्जर एक ऐसा डकैत था जिसके एनकाउंटर की मांग उसे वक्त देश के संसद में हुई थी जगन गुर्जर के पूरी जिंदगी की हैरतअंगेज कहानी बहुत ही ज्यादा डरने वाली और खतरनाक है,

जगन गुर्जर कैसे बना डकैत

जगन गुर्जर आखिर डकैत कैसे बना ये कहानी भी बड़ी हैरान करने वाली है की कैसे एक पंडित पिता का बेटा अपने पिता के हुए अपमान का बदला लेने के लिए चंबल के बीहड़ में गया और उसके बाद जब वह वहां से लौटा तो हर एक से उसने चुन चुन कर बदला लिया, बताएंगे विस्तार से आज के इस वीडियो में नमस्कार देख रहे हैं बीडीएफ न्यूज़, बात है साल 1994 की जब जगन गुर्जर की उम्र महज 20 साल की थी जब उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा की पीछे मुड़कर उसने कभी नहीं देखा पहले डकैत मोहन गुर्जर के गैंग में शामिल हुआ और एक के बाद एक कई वारदातों की फेहरिस्त लगा दी, जगन गुर्जर का नाम कभी चंबल के बिहड़ों में बंदूक के दम पर अपना कानून चलाने वाले एक खतरनाक डकैती के रूप में हुआ करती थी, डाकू जगन गुर्जर अब सिर्फ एक फाइल एक अपराधी के इतिहास और एक अधूरी कहानी बनकर रह गया है, 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी हत्या के साथ उस खतरनाक डकैत का अंत हो गया जिसका नाम तीन राज्यों की पुलिस के लिए सालों तक चुनौती बन रहा, ये वही जगन गुर्जर था जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद तक पहुंची थी लेकिन विडंबना देखिए जो कभी लाखों के इनामी डाकू के रूप में पहचाना जाता था वही बाद के सालों में ₹3 के खुले पैसों और पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसे मामूली बातों पर झगड़ा करने लगा था, डकैत जगन गुर्जर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही,

राजस्थान के धौलपुर जिले का रहने वाला था जगन

राजस्थान के धौलपुर जिले के डांग इलाके के भभूतिपूरा गांव में जन्मे जगन का बचपन बहुत ही साधारण था उसके पिता शिवचरण गुर्जर एक मंदिर में पूजा पाठ यानी पुजारी का काम करते थे परिवार दूध बेचकर गुजर बसर करता था लेकिन एक विवाद ने उसके जिंदगी के दशा बदल दी, मंदिर कमेटी से हुए झगड़े के बाद से पुलिस से बचने के लिए वह चंबल की बिहड़ों में भागा और फिर कभी सामान्य जिंदगी में वापस ही नहीं आ पाया, 1994 में सिर्फ 20 साल की उम्र में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ इसके बाद उसने जुर्म के दुनिया में ऐसा कदम रखा की पीछे मुड़कर नहीं देखा पहले डकैत मोहन गुर्जर की गैंग में शामिल हुआ और फिर अपने ही गुरु तथा जीजा के हथियारों की हत्या कर खुद की अलग गैंग बनाई और धीरे-धीरे राजस्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल इलाकों में उसका नाम खौफ का पर्याय बन गया हत्या अपहरण फिरौती डकैती और लूट जैसे 125 से ज्यादा मुकदमे उसके नाम पर दर्ज हुए,

देश की संसद में उठी थी उसके एनकाउंटर की मांग

जगन गुर्जर का आतंक कितना ज्यादा बढ़ चुका था कि साल 2019 में नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में खड़े होकर उसके एनकाउंटर की मांग की थी, संसद में उन्होंने कहा था कि जगन गुर्जर जैसे खूंखार अपराधी की वजह से लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, किसी डाकू के खिलाफ संसद में इस तरह से एनकाउंटर की मांग उठाने अपने आप में एक आसाधारण घटना थी लेकिन कहा जाता है कि जितना जगन गुर्जर का आतंक था उतना ही बड़ा उसके भीतर एनकाउंटर का डर भी था, पुलिस का दबाव बढ़ता तो वह आत्मसमर्पण कर दिया करता, साल 2001 में उसने पहली बार धौलपुर के तत्कालीन एसपी बिजू जॉर्ज जोसेफ के सामने सरेंडर किया जेल से बाहर आया तो फिर अपराध की दुनिया में लौट आया, 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में दूसरी बार आत्मसमर्पण किया, इसके बाद भी कोई बदलाव नहीं आया, तीसरी बार 2018 में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने हथियार डाल दिए पूछताछ में उसने माना था की बिहड़ों की जिंदगी, गंदा पानी, और लगातार भागते रहने की थकान ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया,

बेटी की शादी के बाद अपराध की दुनिया छोड़ने की खाई थी कसम

सरेंडर करने के बाद कुछ वक्त ऐसा भी आया जब लगा कि शायद जगन गुर्जर बदल जाएगा उसने अपनी बेटी की शादी में अपराध छोड़ने की कसमें खाई पत्नी को चुनाव भी लाडवाया, लेकिन हार के बाद फिर से हथियार उठाया इसके बाद उसका व्यवहार और भी ज्यादा अस्थिर होता चला गया, साल 2019 में वह सिर्फ ₹3 के खुले पैसों को लेकर दुकानदार से लड़ गया दूसरी बार पंचर ठीक से नहीं बनने पर विवाद कर बैठा, छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो जाना उसकी पहचान बन चुका था, इसी दौरान उसने दो महिलाओं के साथ अमानवीय मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया था, जिससे कि पूरे राजस्थान में आक्रोश फैल गया था, कभी धौलपुर के महल को उड़ाने की धमकी देने वाला यही डाकू बाद में मीडिया के सामने शिकायत करता दिखाई दिया कि उसे मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा है, और समाज ने उसे पूरी तरह से बहिष्कृत कर दिया है, उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डीजीपी को पत्र लिखकर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी, एक वक्त ऐसा भी था जब उसके डर से गांव में शादियां तक रुक जाए करती थी, खुद उसके गांव में लगभग 10 साल तक कोई बारात नहीं आई उसके आतंक का असर सिर्फ पुलिस के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं था बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ-साफ दिखाई देता था, आखिरकार 29 जून 2026 को राजस्थान के अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी कहानी खत्म हो गई, आरोप है कि भरतपुर की कुलदीप जघिना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने तौलिया से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी, जिस व्यक्ति ने तीन दशक तक पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती दी, उसका अंत जेल की चार दिवारी के अंदर हुआ, जगन गुर्जर की जिंदगी बताती है कि अपराध की दुनिया में बंदूक भले ही कुछ वक्त के लिए ताकत दे दे लेकिन उसका अंजाम अक्सर अकेलापन दर और हिंसक मौत होता है चंबल के भेद का यह चर्चित नाम अब इतिहास का हिस्सा हो चुका है लेकिन उसके अपराधों के दहशत और उसके जीवन का विरोधाभास लंबे वक्त तक याद किया जाता रहेगा।

Gaurav Saksena

गौरव सक्सेना बीडीएफ न्यूज में सिनीयर डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। और पिछले 10 साल से पत्रकारिता कर रहें है, साल 2016 में इन्होंने हिंदुस्थान समाचार से बतौर कॉपी एडिटर के तौर पर अपने कैरियर की शुरुवात की और फिर कई न्यूज पेपर में लिखते रहे, नैड्रिक न्यूज में इनकी एक स्टोरी बहुत चर्चा में रही जिसमें रिक्शे पर जिंदगी पर आधारित सोशल खबर लिखी थी, इंटरनेशनल और राजनीति की खबरों में इनकी खास पकड़ है।

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