पंचमुखी बेलपत्र: अभी आषाढ़ का महीना चल रहा है। इसके बाद सावन का महीना आएगा, जो महादेव—देवों के देव—को समर्पित है। सावन के दौरान, भगवान शिव ब्रह्मांड के पालनहार की भूमिका निभाते हैं। सावन में महादेव की विशेष पूजा और जलाभिषेक (जल से स्नान कराने की रस्म) करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए ‘कांवड़’ में पवित्र जल लाते हैं।
‘पंचांग’ के अनुसार, इस साल सावन 30 जुलाई को शुरू होगा और 28 अगस्त को महीने की पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा।
सावन में महादेव की पूजा के लिए किसी बड़ी तैयारी की ज़रूरत नहीं होती; भगवान सिर्फ़ ‘पंचमुखी बेलपत्र’ चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव की पूजा में बेलपत्र को बहुत शुभ माना जाता है, और इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में बहुत लाभ मिलता है। आइए जानते हैं कि ‘पंचमुखी बेलपत्र’ क्या है और इसे शिवलिंग पर चढ़ाने का सही तरीका क्या है।
‘पंचमुखी बेलपत्र’ क्या है?
आपने शायद आम तीन पत्तियों वाला बेलपत्र देखा होगा, लेकिन ‘पंचमुखी बेलपत्र’ को बहुत खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। ‘पंचमुखी बेलपत्र’ में पांच पत्तियां होती हैं; यानी एक ही डंठल से पांच पत्तियां निकलती हैं। इसीलिए पांच पत्तियों वाला बेलपत्र बहुत कम मिलता है। ‘पंचमुखी बेलपत्र’ का ज़िक्र *शिव पुराण* और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
तीन पत्तों वाले *बेलपत्र* को त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – का प्रतीक माना जाता है। *पंचमुखी* (पाँच पत्तों वाले) *बेलपत्र* के पाँच पत्तों को भगवान शिव के पाँच मुखों – सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान – का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि जो लोग *शिवलिंग* पर यह विशेष *बेलपत्र* चढ़ाते हैं, उन्हें महादेव का विशेष आशीर्वाद मिलता है; इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
शिवलिंग पर ‘पंचमुखी बेलपत्र’ चढ़ाने की विधि
*शिवलिंग* पर चढ़ाने से पहले *पंचमुखी बेलपत्र* को पानी से साफ़ कर लें। ध्यान रखें कि पत्ता कहीं से कटा-फटा न हो। चढ़ाने से पहले अपनी अनामिका उंगली (ring finger) से सभी पाँच पत्तों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें। *शिवलिंग* पर *पंचमुखी बेलपत्र* रखते समय उसे दोनों हाथों से पकड़ें। चढ़ाते समय ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।






