क्या कलयुग का अंत करीब आ रहा है? ‘कालज्ञानम’ में दुनिया में होने वाली तबाही की डरावनी भविष्यवाणियों के बारे में जानें

हिंदू धर्म: भारत कई ऐसे संतों और ऋषियों का घर रहा है, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने हजारों साल बाद होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी की थी। खास बात यह है कि नोस्ट्राडेमस या बाबा वांगा की भविष्यवाणियों में अक्सर इस्तेमाल होने वाली पेचीदा और सांकेतिक भाषा के विपरीत, ये भविष्यवाणियां काफी साफ शब्दों में बताई गई हैं।

इन ऋषियों में प्रमुख हैं आंध्र प्रदेश के एक सिद्ध संत, श्री पोटुलुरी वीरब्रह्मेंद्र स्वामी। माना जाता है कि स्वामी वीरब्रह्मेंद्र का जन्म 1608 में हुआ था। उन्होंने तेलुगु भाषा में ‘कालज्ञानम’ नाम का एक ग्रंथ लिखा, जिसमें भविष्य की कई घटनाओं का विवरण बताया गया है। समय के साथ, सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ‘कालज्ञानम’ की भविष्यवाणियों ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, जिससे लोगों में इन भविष्यवाणियों के प्रति दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

भविष्य से जुड़ी भविष्यवाणियां

लाल बारिश और समुद्र का जलस्तर बढ़ना

कहा जाता है कि भविष्य में आसमान से लाल बारिश होगी। ऐसी भविष्यवाणियां भी हैं जिनमें कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई तटीय शहर डूब जाएंगे। कुछ लोग इन भविष्यवाणियों को जलवायु परिवर्तन, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के संदर्भ में देखते हैं।

बढ़ता तापमान और दो सूर्यों का दिखना

एक कथित भविष्यवाणी में पृथ्वी के बहुत अधिक गर्म होने और पहाड़ों से आग निकलने जैसी घटनाओं का वर्णन है। इसे प्राकृतिक घटनाओं, ज्वालामुखी गतिविधियों या खगोलीय घटनाओं का सांकेतिक अर्थ माना जाता है।

दिन में तारों का दिखना

‘कालज्ञानम’ से जुड़ी कुछ व्याख्याओं में कहा गया है कि एक समय ऐसा आएगा जब दिन के उजाले में भी तारे दिखाई देंगे। कहा जाता है कि इसके बाद कुछ इलाकों में आबादी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसे किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा या वायुमंडल में होने वाले असाधारण बदलाव से जोड़कर देखा जाता है।

तिरुपति बालाजी की वैश्विक ख्याति

कहा जाता है कि भविष्य में तिरुपति बालाजी मंदिर की ख्याति पूरी दुनिया में फैल जाएगी और अलग-अलग धर्मों के लोग आशीर्वाद लेने के लिए यहां आएंगे। इसे मंदिर की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता से जोड़ा जाता है। **संघर्ष और उथल-पुथल के 108 साल**

एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, ‘कलियुग*’के 5,000 साल पूरे होने के बाद—और अधर्म के अंत से पहले—दुनिया को लगभग 108 वर्षों तक संघर्ष, अशांति और बड़े बदलावों का सामना करना पड़ेगा। इसे मानव सभ्यता के लिए एक अहम बदलाव का दौर माना जाता है।

मीन और मेष राशि में शनि के गोचर के दौरान भीषण युद्ध

एक और भविष्यवाणी कहती है कि जब शनि मीन और मेष राशियों से जुड़ी एक खास स्थिति में होंगे, तब एक भीषण और निर्णायक वैश्विक युद्ध हो सकता है। हालाँकि यह दावा ज्योतिषीय घटनाओं और दुनिया के राजनीतिक हालात से जुड़ा है, फिर भी इसे भविष्य में होने वाली पक्की घटना नहीं माना जाना चाहिए।

‘विश्ववसु’ वर्ष में कल्कि का अवतार

सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले दावों में से एक यह है कि भगवान कल्कि ‘विश्ववसु’ नाम के वर्ष में अवतार लेंगे। मान्यता के अनुसार, भगवान कल्कि अधर्म और अत्याचार को खत्म करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। हालाँकि, इस भविष्यवाणी के समय और वर्ष की गणना को लेकर अलग-अलग राय और व्याख्याएँ हैं।

निष्कर्ष

‘कालज्ञानम’ एक रहस्यमयी ग्रंथ है जिसमें कलयुग के अंत के बारे में कई ऐसी भविष्यवाणियां हैं जो किसी को भी हैरान कर सकती हैं। आइए, इन भविष्यवाणियों के बारे में जानें।

Tripti Panday

तृप्ती पान्डेय बीडीएफ न्यूज में सिनीयर डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। और पिछले 5 साल से पत्रकारिता कर रहीं है, इन्होंने इससे पहले कई न्यूज पेपर जैसे अमर उजाला, दैनिक जागरण,लोकल वोकल, जैसी प्रमुख न्यूज वेबसाइट्स और ऐप्स में काम किया है। राजनीति की खबरों में इनकी खास पकड़ है।

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