31 मार्च को, कानपुर पुलिस ने बिना इजाज़त किडनी ट्रांसप्लांट करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार करके एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस गैंग ने बिहार के एक नौजवान आयुष को मेरठ की पारुल तोमर के लिए किडनी डोनेट करने के बदले ₹6 लाख का ऑफ़र देकर फंसाया था। यह पूरा सौदा एक Telegram ग्रुप के ज़रिए तय हुआ था; हालाँकि, जब उस नौजवान को तय रकम से कम पैसे मिले, तो मामला पुलिस तक पहुँच गया। जाँच में जब मेरठ के Alpha Hospital के डॉक्टर—डॉ. अफ़ज़ल—और दूसरे स्टाफ़ सदस्यों के कथित तौर पर शामिल होने की बात सामने आई, तो हड़कंप मच गया। कानपुर पुलिस ने तब से कई लोगों को जेल भेज दिया है, जिनमें Ahuja Hospital के डॉ. सुरजीत, उनकी पत्नी प्रीति आहूजा, और शिवम—एक एम्बुलेंस ड्राइवर जिसने खुद को फ़र्ज़ी डॉक्टर बताया था—शामिल हैं।
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के इस गैर-कानूनी मामले ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचा दी है।
इन घटनाक्रमों के बीच, डॉ. अफ़ज़ल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह बिस्तर पर लेटे हुए हैं और उनके चारों ओर नोटों के बंडल बिखरे हुए हैं। हाथ में कैश थामे, आरोपी डॉक्टर को सोशल मीडिया के लिए एक ‘रील’ बनाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में उनके साथ एक और व्यक्ति भी नज़र आ रहा है।
Telegram पर किडनी के सौदे और मेरठ का कनेक्शन
जाँच में पता चला है कि इस गैंग ने डोनर (किडनी देने वाले) खोजने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया था। मेरठ के Alpha Hospital के कथित डॉक्टर—डॉ. अफ़ज़ल—ने Telegram पर एक ज़रूरत के बारे में पोस्ट किया था। देहरादून में पढ़ाई कर रहे बिहार के छात्र आयुष को ₹6 लाख का ऑफ़र दिया गया था; हालाँकि, उसे आखिर में सिर्फ़ ₹3.50 लाख ही मिले। इसी विवाद की वजह से पुलिस इस गैर-कानूनी धंधे का पर्दाफ़ाश कर पाई। मेरठ का स्वास्थ्य विभाग भी अब हरकत में आ गया है, और संदिग्धों की तलाश जारी है।
CMO का नोटिस और अस्पताल का स्पष्टीकरण
मेरठ के CMO डॉ. अशोक कटारिया ने Alpha Hospital को एक नोटिस जारी करके तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण माँगा है। इस नोटिस में कई कर्मचारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें फ़िज़ियोथेरेपिस्ट अमित कुमार, डॉ. वैभव मुद्गल, और डॉ. अफ़ज़ल शामिल हैं। दूसरी ओर, अस्पताल के मैनेजर सचिन ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि उनके अस्पताल में डॉ. अफ़ज़ल नाम का कोई भी व्यक्ति काम नहीं करता है, और उनके मालिक अमित पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। फ़िलहाल, पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड की जाँच-पड़ताल कर रही है।
डॉक्टर नहीं: OT टेक्नीशियन ने की थी सर्जरी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘डॉ.’ मुदस्सर अली के बारे में हुआ है। पुलिस को शुरू में लगा था कि अली एक डॉक्टर है, जिसने पारुल की सर्जरी की थी। लेकिन, जब DCP S.M. कासिम आबिदी की टीम उसके घर पहुँची, तो उसकी पत्नी ने बताया कि वह डॉक्टर नहीं, बल्कि एक अस्पताल में OT (ऑपरेशन थिएटर) टेक्नीशियन है। इस गिरोह में शामिल एम्बुलेंस ड्राइवर शिवम भी डॉक्टर बनकर लोगों को ठग रहा था। पुलिस अब इस पूरे धोखाधड़ी के जाल की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
आहूजा अस्पताल और IMA का कनेक्शन
इस मामले के सिलसिले में, कानपुर पुलिस ने आहूजा अस्पताल के मालिक डॉ. सुरजीत सिंह और उनकी पत्नी प्रीति आहूजा को भी गिरफ़्तार कर लिया है। प्रीति आहूजा IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के कानपुर चैप्टर की उपाध्यक्ष थीं। उनके साथ गाज़ियाबाद के दो OT टेक्नीशियन—कुलदीप और राजेश—को भी गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस ने आयुष (किडनी डोनर) और पारुल तोमर (किडनी लेने वाली मरीज़) को अस्पताल से छुट्टी दे दी है, और उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ भेज दिया है।






