FDRC क्या है और गौतमबुद्धनगर पुलिस ने अब तक कितने परिवारों को टूटने से बचाया!

FDRC NOIDA POLICE : गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लत्र्मी सिंह जी ने कल ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी में एफडीआरसी यानी (फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक) की 6ठी वर्षगांठ मनाई, लेकिन क्या आप जानते है की नोएडा पुलिस का एफडीआरसी फॉर्मूला क्या है जो अब उन शादीशुदा जोड़ों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो शादी बाद किन्ही वजहों से तलाक के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते है, तो चलिए आपको आज बताते है की आखिर एफडीआरसी क्या है ये कैसे काम करता है और जिले में अबतक जो एफडीआरी है उनसे कितने लोगों को फायदा हुआ है,

2020 में गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने की शुरुवात

FDRC का पूरा नाम फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक/सेंटर यह गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस द्वारा साल 2020 में नोएडा के पहले पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई थी। लेकिन उसके बाद लक्ष्मी सिंह ने इस मॉडल को एक नई ऊंचाई दी जिससे इसका व्यापक विस्तार हुआ, एफडीआरसी नोएडा पुलिस द्वारा शुर की गई एक अनूठी पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को कोर्ट-कचहरी या एफआईआर (FIR) तक पहुंचने से पहले आपसी बातचीत, काउंसिलिंग और मध्यस्थता के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना है।

FDRC पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल!

नोएडा पुलिस ने विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इसकी शुरुआत और विस्तार किया है, जब साल 2020 में नोएडा पुलिस ने सबसे पहले शारदा यूनिवर्सिटी  के सहयोग से ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में पहले FDRC केंद्र की शुरुआत की उसके बाद  इस मॉडल की सफलता को देखते हुए नोएडा पुलिस ने इसका दायरा बढ़ाया, और दूसरा केंद्र नोएडा के सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एमिटी यूनिवर्सिटी  के सहयोग से खोला गया।और फिर तीसरा केंद्र: सितंबर 2025 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सहयोग से ग्रेटर नोएडा के चेरी काउंटी पुलिस चौकी में स्थापित किया,

आखिर ये यह कैसे काम करता है?

इन केंद्रों पर केवल पुलिसकर्मी ही नहीं होते, बल्कि कानून के विशेषज्ञ (लीगल एक्सपर्ट्स), मनोवैज्ञानिक (Psychologists) और पेशेवर काउंसलर भी शामिल होते हैं।  जो पति-पत्नी या परिवारों के बीच ‘ईगो’ या संवाद की कमी (Communication Gap) के कारण होने वाले झगड़ों को शांति से सुनता है, और बिना किसी कानूनी मुकदमे के रिश्ता बचाने का प्रयास करता है।

FDRC की सफलता दर कितनी?

नोएडा पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इसके जरिए आने वाले पारिवारिक विवादों का निपटारा करने में 85% से 90% से भी अधिक की सफलता दर देखी गई है, जिससे हजारों घर टूटने से बचे हैं, नोएडा पुलिस के मुताबिक तीनों एफडीआरसी में अब तक कुल 1014 शिकायतें मिलीं, जिनमें से कुल 906 का निस्तारण, और 108 मामले मध्यस्थता में है, नोएडा पुलिस के इस पहल को आप कैसे देखते है,

Gaurav Saksena

गौरव सक्सेना बीडीएफ न्यूज में सिनीयर डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। और पिछले 10 साल से पत्रकारिता कर रहें है, साल 2016 में इन्होंने हिंदुस्थान समाचार से बतौर कॉपी एडिटर के तौर पर अपने कैरियर की शुरुवात की और फिर कई न्यूज पेपर में लिखते रहे, नैड्रिक न्यूज में इनकी एक स्टोरी बहुत चर्चा में रही जिसमें रिक्शे पर जिंदगी पर आधारित सोशल खबर लिखी थी, इंटरनेशनल और राजनीति की खबरों में इनकी खास पकड़ है।

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