“बदबू आ रही थी, लेकिन ड्राइवर ने बस नहीं रोकी”—एक्सप्रेसवे पर ‘जलती हुई बस’ के डरावने मंज़र को एक यात्री ने बयां किया

दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर आग लगने से पहले यात्रियों को धुआं और बदबू महसूस हुई थी; हालांकि, आरोप है कि ड्राइवर ने बस रोकने से इनकार कर दिया। हादसे के बाद ड्राइवर और कंडक्टर दोनों मौके से भाग गए।

ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे के पास चलती हुई स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद आग से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है।

बस में सवार यात्री सुनील कुमार ने हादसे की पूरी कहानी बताई; उनकी शिकायत के आधार पर इस मामले में FIR दर्ज की गई है। ‘इंडिया टुडे’ से बात करते हुए सुनील ने बताया कि आग लगने से पहले बस के अंदर धुआं और बदबू महसूस हुई थी। कुछ यात्रियों ने ड्राइवर से बस रोकने को कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

सुनील ने बताया कि यह घटना बुधवार रात करीब 11:30 बजे हुई। उस समय कुछ यात्री सो रहे थे जबकि कुछ जाग रहे थे; बस में सवार ज़्यादातर लोग रात को सोने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान यात्रियों को बदबू महसूस होने लगी और कुछ ने ड्राइवर को इसके बारे में बताया। इतना ही नहीं, यात्रियों ने ड्राइवर से बस रोकने को भी कहा; लेकिन उसने उनकी गुहार को नज़रअंदाज़ कर दिया।

‘जब धुआं बहुत ज़्यादा हो गया, तब बस रोकी गई’

बस में सवार यात्री सुनील ने बताया कि जब बस के अंदर तेज़ी से धुआं भरने लगा और आग फैलने लगी, तब जाकर गाड़ी रोकी गई। उनका दावा है कि उस समय ड्राइवर और कंडक्टर मौके से भाग गए, जबकि बस के अंदर अफरातफरी मच गई।

सुनील ने बताया कि जब बस से धुआं निकल रहा था, तब ड्राइवर गुटखा और पान खाने और बीड़ी या सिगरेट पीने में व्यस्त था। जब यात्रियों ने उसे रोकने के लिए कहा, तो उसे हंसते हुए भी सुना गया; उसने सबकी बात अनसुनी कर दी और अपनी मनमर्जी की। सुनील ने बताया कि आग लगने के बाद यात्रियों ने खुद लोगों को बचाने की कोशिश की।

हालांकि बस में आग बुझाने वाला यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) था, लेकिन उससे आग नहीं बुझ पाई। इसके बाद बस के अंदर से चीखने-चिल्लाने और मदद मांगने की आवाज़ें आने लगीं।

सुनील ने कहा कि उन्होंने आग बुझाने वाले यंत्र से बस की खिड़की तोड़ने की भी कोशिश की। सभी ने फँसे हुए यात्रियों को बचाने के लिए मिलकर कोशिश की, लेकिन आग बहुत तेज़ी से फैल रही थी। कई लोग अंदर ही फँसे रह गए; नौ लोग इस हादसे का शिकार हो गए और समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। उन्हें बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला और नौ यात्रियों की जान चली गई।

‘अगर बस को समय रहते किनारे रोक लिया जाता, तो जानें बचाई जा सकती थीं’

सुनील का मानना ​​है कि अगर बस को समय रहते सड़क के किनारे रोक लिया जाता, तो यात्रियों को बचने का मौका मिल सकता था। उन्होंने बताया कि घटना के समय कई यात्री सो रहे थे, क्योंकि रात के करीब 11:30 बज रहे थे—यह वह समय है जब यात्री आमतौर पर सो रहे होते हैं।

घटना के दौरान बस में अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्री किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे; बाहर निकलने वालों में से एक ने घटना का वीडियो भी बनाया। वीडियो में बस आग की लपटों में घिरी हुई दिखाई दे रही है।

सुनील ने बताया कि जैसे-जैसे आग तेज़ी से फैली, बस के अंदर से लोगों की आवाज़ें सुनाई देने लगीं। बाहर मौजूद यात्री उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आग की तेज़ी के कारण बस के अंदर जाना बहुत मुश्किल हो गया था।

बस दिल्ली से महोबा जा रही थी

चलती हुई स्लीपर बस में आग जेवर पुलिस स्टेशन इलाके में लगी, जो यमुना एक्सप्रेसवे के ज़ीरो पॉइंट से लगभग 32 किलोमीटर आगे है। खबरों के अनुसार, बस में 40 से 50 यात्री सवार थे। आग लगने के बाद, कई यात्री बस से कूदकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे; हालाँकि, नौ लोग बाहर नहीं निकल पाए और हादसे में उनकी मौत हो गई।

यह बस—जिसे राज कल्पना ट्रैवल्स (रजिस्ट्रेशन नंबर BR32 PA8647) चलाती है—दिल्ली से महोबा जा रही थी। यह ऑपरेटर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लिए सेवाएँ चलाता है। दुर्घटना का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।

पुलिस अब सुनील कुमार के बयान और शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जाँच कर रही है। घटना के दौरान ड्राइवर और कंडक्टर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आग लगने की वजह और बस को समय पर क्यों नहीं रोका गया, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

Tripti Panday

तृप्ती पान्डेय बीडीएफ न्यूज में सिनीयर डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। और पिछले 5 साल से पत्रकारिता कर रहीं है, इन्होंने इससे पहले कई न्यूज पेपर जैसे अमर उजाला, दैनिक जागरण,लोकल वोकल, जैसी प्रमुख न्यूज वेबसाइट्स और ऐप्स में काम किया है। राजनीति की खबरों में इनकी खास पकड़ है।

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