भारत विदेश से पेट्रोल और डीज़ल इंपोर्ट करने के लिए अपने जहाज खरीदेगा, जिससे ₹6 लाख करोड़ की बचत होगी

भारत कच्चे तेल और फ्यूल के ट्रांसपोर्ट के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भर है। इस लॉजिस्टिक्स पर सालाना ₹6 लाख करोड़ का बड़ा खर्च आता है। अब, बड़ी तेल कंपनियां इस खर्च को कम करने की योजना बना रही हैं। देश का पैसा बचाने के लिए यह एक बड़ी पहल है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के साथ एक खास जॉइंट वेंचर बनाने का अहम फैसला किया है।

यह नई कंपनी लगभग ₹15,000 करोड़ के बड़े इन्वेस्टमेंट से 59 जहाज खरीदेगी। इसका मुख्य मकसद विदेशी जहाजों पर भारत की निर्भरता कम करना है, जिससे सालाना ₹6 लाख करोड़ की बचत होगी।

शिपिंग कॉर्पोरेशन की बड़ी हिस्सेदारी होगी

तीन सरकारी तेल कंपनियों की इस प्रस्तावित नई कंपनी में कुल 35 परसेंट हिस्सेदारी होगी। शिपिंग कॉर्पोरेशन 50 परसेंट हिस्सेदारी के साथ लीड पार्टनर की भूमिका निभाएगी। बाकी 15 परसेंट हिस्सेदारी मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) के पास होगी। MDF एक खास सरकारी पहल है जिसे मैरीटाइम सेक्टर को फाइनेंशियल मदद देने के लिए ₹25,000 करोड़ के फंड से बनाया गया है। इसका मुख्य मकसद विदेशी शिपिंग पर निर्भरता खत्म करना और कीमती विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना है।

₹15,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट, 59 नए जहाज

शिपिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन बीके त्यागी के मुताबिक, इस जॉइंट वेंचर की टेक्निकल शर्तों पर काम तेज़ी से चल रहा है। इस मास्टर प्लान के तहत 59 जहाज खरीदे जाएंगे। इनमें बड़े क्रूड कैरियर, गैस कैरियर और ऑफशोर जहाज शामिल होंगे। पूरी खरीद प्रक्रिया में लगभग ₹15,000 से ₹17,000 करोड़ का भारी इन्वेस्टमेंट होने का अनुमान है। यह नया जॉइंट वेंचर कैसे काम करेगा?

इस नई पार्टनरशिप में हिस्सा लेने वाली सभी कंपनियों के रोल साफ़ तौर पर तय हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन इस वेंचर को अपनी टेक्निकल, ऑपरेशनल और रेगुलेटरी एक्सपर्टीज़ देगा। वहीं, तेल कंपनियाँ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए माल ढुलाई की पक्की गारंटी देंगी। शिपिंग कॉर्पोरेशन इन जहाजों के मैनेजमेंट की पूरी ज़िम्मेदारी लेगा, जिसके लिए उसे एक तय मैनेजमेंट फ़ीस मिलेगी।

देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मज़बूत करना

अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से विदेशी झंडे वाले जहाज़ किराए पर लेने का चलन काफ़ी कम हो जाएगा। इससे न सिर्फ़ विदेशी मुद्रा का बाहर जाना रुकेगा बल्कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी भी काफ़ी मज़बूत होगी। माल ढुलाई की लागत पर घरेलू कंट्रोल से भविष्य में एनर्जी सप्लाई सिस्टम ज़्यादा स्टेबल और सुरक्षित बनेगा

Tripti Panday

तृप्ती पान्डेय बीडीएफ न्यूज में सिनीयर डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। और पिछले 5 साल से पत्रकारिता कर रहीं है, इन्होंने इससे पहले कई न्यूज पेपर जैसे अमर उजाला, दैनिक जागरण,लोकल वोकल, जैसी प्रमुख न्यूज वेबसाइट्स और ऐप्स में काम किया है। राजनीति की खबरों में इनकी खास पकड़ है।

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