केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और देश की रणनीति अब एकल संस्थान से आगे बढ़कर बहु-संस्थागत नेटवर्क मॉडल का रूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में एक AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट स्थापित करने की योजना थी, लेकिन व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इसे 12 संस्थानों के नेटवर्क मॉडल में परिवर्तित किया गया है, ताकि सेफ्टी, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर समन्वित, संरचित और तेज़ गति से काम किया जा सके
नीति ढांचे और संस्थागत संरचना को मजबूत किया गया
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह नेटवर्क मॉडल भारत की विविध शैक्षणिक और शोध क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। इन 12 संस्थानों के माध्यम से एआई सेफ्टी से जुड़े विभिन्न आयामों जैसे एल्गोरिदमिक पारदर्शिता, डेटा गवर्नेंस, मॉडल वैलिडेशन, साइबर सुरक्षा, एथिक्स फ्रेमवर्क और रिस्क असेसमेंट पर समन्वित रूप से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि अलग-अलग विशेषज्ञता वाले संस्थान जब एक साझा लक्ष्य के साथ जुड़ते हैं तो परिणाम अधिक प्रभावी और व्यावहारिक होते हैं।अश्विनी वैष्णव ने अब तक की यात्रा को “मीनिंगफुल” और “मेथडिकल” बताते हुए कहा कि सरकार ने जल्दबाज़ी में घोषणाएं करने के बजाय पहले एक मजबूत आधार तैयार किया। उन्होंने बताया कि AI मिशन के तहत सबसे पहले बुनियादी ढांचे, नीति ढांचे और संस्थागत संरचना को मजबूत किया गया। इसके बाद AI स्टैक की सभी लेयर्स डेटा लेयर, कंप्यूट लेयर, मॉडल लेयर और एप्लिकेशन लेयर पर व्यवस्थित तरीके से काम शुरू किया गया।
उच्च स्तर की AI सेफ्टी पर विशेष फोकस
वैष्णव स्पष्ट किया कि किसी भी देश के लिए AI में दीर्घकालिक सफलता केवल उन्नत मॉडल विकसित करने से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए मजबूत कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्च गुणवत्ता वाला डेटा, कुशल मानव संसाधन और मजबूत सेफ्टी मैकेनिज्म की आवश्यकता होती है। भारत ने इन सभी घटकों पर चरणबद्ध तरीके से निवेश और नीति निर्माण किया है।भारत अब अपने AI मिशन के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। इस चरण में एडवांस्ड फाउंडेशन मॉडल्स के विकास, कॉमन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना और उच्च स्तर की AI सेफ्टी पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि देश में साझा कंप्यूट प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, ताकि स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और उद्योगों को अत्याधुनिक कंप्यूटिंग संसाधनों तक समान और सुलभ पहुंच मिल सके।
शोधकर्ताओं और इंडस्ट्री लीडर्स को भारत के AI इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर संवाद
भारत की रणनीति केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक AI इकोसिस्टम का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में भी काम कर रहा है। वैष्णव ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और इंडस्ट्री लीडर्स को भारत के AI इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर संवाद और सहयोग की पहल की गई है। इससे न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप सेफ्टी और एथिक्स फ्रेमवर्क भी विकसित होंगे।
बुनियादी ढांचे में कुल निवेश 250 बिलियन डॉलर से ज्यादा
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि AI और उससे जुड़े डिजिटल बुनियादी ढांचे में कुल निवेश 250 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। यह निवेश डेटा सेंटर्स, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार जैसे क्षेत्रों में किया गया है। उन्होंने कहा कि इस स्तर का निवेश भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिला रहा है।साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वेंचर कैपिटल के माध्यम से डीप-टेक सेक्टर में लगभग 20 बिलियन डॉलर का निवेश पार हो चुका है। यह निवेश AI, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को सशक्त बना रहा है। मंत्री के अनुसार, यह संकेत है कि निवेशकों का भरोसा भारतीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर लगातार बढ़ रहा है।
AI सेफ्टी केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है
उन्होंने कहा कि AI सेफ्टी केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, कानूनी और नैतिक आयामों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए 12 संस्थानों का नेटवर्क न केवल तकनीकी रिसर्च पर काम करेगा, बल्कि एथिकल गाइडलाइंस, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े पहलुओं पर भी गहन अध्ययन करेगा। उद्देश्य यह है कि AI का विकास जिम्मेदार, सुरक्षित और समावेशी तरीके से हो।मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की AI नीति “इनोवेशन विद रिस्पॉन्सिबिलिटी” के सिद्धांत पर आधारित है। उनका कहना था कि यदि AI का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन और शासन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ जोखिमों को पहचानना और उन्हें कम करने के लिए सक्रिय उपाय करना भी उतना ही आवश्यक है।
मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया
उन्होंने कहा कि भारत ने पहले मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया, जिसके आधार पर अब AI समाधान विकसित किए जा रहे हैं। यह डिजिटल आधार—जैसे डिजिटल पहचान, भुगतान प्रणालियां और डेटा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म AI एप्लिकेशन्स के लिए एक सक्षम वातावरण प्रदान करता है। इससे स्केलेबल और प्रभावी समाधान विकसित करना संभव हो रहा है।अश्विनी वैष्णव ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत AI सेफ्टी और एडवांस्ड मॉडल डेवलपमेंट दोनों क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क मॉडल के माध्यम से विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग, ज्ञान साझा करना और संयुक्त परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ेंगी, जिससे निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सकेगा।
भारत का लक्ष्य केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता और मानक निर्धारक बनना है। AI सेफ्टी के क्षेत्र में मजबूत ढांचा तैयार कर भारत यह संदेश देना चाहता है कि नवाचार और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं।मंत्री के अनुसार, सरकार, उद्योग, स्टार्टअप्स, अकादमिक संस्थान और अंतरराष्ट्रीय साझेदार सभी मिलकर एक समावेशी और सुरक्षित AI भविष्य की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक प्रयास ही भारत को AI युग में अग्रणी बनाएगा।इस प्रकार, 12 संस्थानों के नेटवर्क मॉडल, सैकड़ों बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, डीप-टेक में बढ़ते वेंचर कैपिटल और एडवांस्ड मॉडल्स पर फोकस के साथ भारत का AI मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रणनीतिक और संरचित दृष्टिकोण भारत को वैश्विक AI परिदृश्य में किस स्तर तक पहुंचाता है।






